October 19, 2026

चारधाम यात्रा में उमड़ी रिकॉर्डतोड़ भीड़, केदारनाथ-बदरीनाथ रूट पर लगा 13 KM लंबा जाम

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उत्तराखंड में इन दिनों चल रही पवित्र चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है। मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी और स्कूलों में छुट्टियां शुरू होने के कारण रिकॉर्डतोड़ संख्या में तीर्थ यात्री और पर्यटक उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। इस भारी भीड़ की वजह से केदारनाथ और बदरीनाथ दोनों ही यात्रा रूटों पर गाड़ियों का चक्का जाम हो गया है। जोशीमठ से लेकर बदरीनाथ हाईवे तक कई किलोमीटर लंबा महाजाम लगा हुआ है, जिससे पैदल मार्ग से लेकर मुख्य हाईवे तक गाड़ियां रेंगने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए ‘गेट सिस्टम’ की वजह से गाड़ियों की कतारें और ज्यादा लंबी होती जा रही हैं।

बदरीनाथ हाईवे पर 13 किलोमीटर लंबी कतारें

जाम की यह भयावह स्थिति केवल वीआईपी वाहनों या केवल हाईवे तक सीमित नहीं है, बल्कि केदारनाथ यात्रा के पैदल रूट पर भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पैदल चलने वालों का भी जाम लग गया है। वहीं दूसरी तरफ, जोशीमठ-बदरीनाथ हाईवे की तस्वीरें बेहद डराने वाली हैं, जहां वाहनों की कई किलोमीटर लंबी हेडलाइट्स और कतारें देखी जा सकती हैं।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जोशीमठ से बद्रीनाथ धाम की तरफ लगभग 6 किलोमीटर और जोशीमठ से ऋषिकेश की तरफ हेलंग तक लगभग 7 किलोमीटर तक गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। यानी कुल मिलाकर इस पूरे पैच पर करीब 13 किलोमीटर लंबा जाम लगा हुआ है, जिसमें हजारों श्रद्धालु घंटों फंसे रहने को मजबूर हैं।

मैदानी इलाकों में 48 डिग्री तक पहुंचा पारा

इस रिकॉर्डतोड़ भीड़ और महाजाम के पीछे दो सबसे मुख्य कारण सामने आ रहे हैं। पहला कारण यह है कि देश के अधिकांश राज्यों में गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं, जिससे लोग सपरिवार यात्रा पर निकल पड़े हैं। दूसरा और सबसे बड़ा कारण यह है कि इस वक्त उत्तर और मध्य भारत के मैदानी क्षेत्र भीषण लू और जानलेवा गर्मी से तप रहे हैं।

मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री से लेकर 48 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है, जिससे बचने के लिए और ठंडी हवाओं के बीच छुट्टियां मनाने के लिए श्रद्धालु और पर्यटक भारी संख्या में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की इस अप्रत्याशित आमद के कारण पर्वतीय मार्गों की क्षमता कम पड़ गई है, जिससे प्रशासन को ट्रैफिक संभालने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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