October 20, 2026

मुंगेली में ‘दोहरा सुशासन’ का आरोप: गरीबों के छज्जों पर चला बुलडोजर, रसूखदारों की बहुमंजिला इमारतों पर सवाल

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छोटे अतिक्रमण पर कार्रवाई, नजूल और सरकारी जमीन पर कथित कब्जों को लेकर उठे सवाल; निष्पक्ष सीमांकन की मांग

मुंगेली। सुशासन, पारदर्शिता और समान कार्रवाई के दावों के बीच मुंगेली शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। शहरवासियों का आरोप है कि प्रशासन और नगर पालिका द्वारा छोटे दुकानदारों तथा गरीबों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जा रही है, जबकि सरकारी और नजूल भूमि पर कथित कब्जे कर बनाई गई बहुमंजिला इमारतों के मामले में कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। इससे शहर में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में मामूली अतिक्रमण के नाम पर दुकानों के छज्जे, नालियों के ऊपर बनाई गई छोटी दीवारें और अन्य निर्माण हटाए गए। कार्रवाई के दौरान छोटे व्यापारियों और आम लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। लोगों का सवाल है कि यदि शहर में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है तो कार्रवाई सभी के लिए एक समान क्यों नहीं दिखाई दे रही?

नाले की जमीन और नजूल भूमि को लेकर उठे सवाल

शहर के बालानी चौक स्थित नाले की भूमि को लेकर भी स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच और सीमांकन की मांग उठाई है। आरोप लगाया जा रहा है कि नाले की भूमि पर पाटकर निर्माण किए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

शहरवासियों की मांग है कि राजस्व विभाग की टीम द्वारा मौके पर नाप-जोख और सीमांकन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और कहीं सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण तो नहीं हुआ है।

इसी तरह खसरा नंबर 370 सहित शहर की अन्य बेशकीमती नजूल और सरकारी जमीनों की भी जांच कराने की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या नियम विरुद्ध निर्माण पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

गरीबों पर कार्रवाई, बड़े निर्माणों पर चुप्पी क्यों?

शहरवासियों का सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की कार्रवाई के कथित असमान स्वरूप को लेकर है। लोगों का कहना है कि छोटे दुकानदारों के छज्जे और मामूली निर्माण हटाने में प्रशासन तेजी दिखाता है, लेकिन कथित रूप से सरकारी या नजूल जमीन पर खड़ी बहुमंजिला इमारतों की जांच को लेकर वही तत्परता नजर नहीं आती।

स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक संरक्षण और प्रभावशाली लोगों की भूमिका के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी भी व्यक्ति पर बेबुनियाद आरोप न लगें और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो दोषियों पर कार्रवाई हो सके।

सूदखोरी से जोड़कर भी लगाए जा रहे आरोप

शहर में कुछ प्रभावशाली लोगों और कथित अवैध निर्माणों को लेकर स्थानीय स्तर पर सूदखोरी एवं राजनीतिक संरक्षण से जुड़े आरोप भी चर्चा में हैं। इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे गंभीर आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही सामने आ सकती है।

शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन को किसी व्यक्ति की सामाजिक या राजनीतिक पहुंच को देखे बिना दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

नए कलेक्टर से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद

लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब शहरवासियों की नजर जिले के नए कलेक्टर पर है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को पुराने मामलों की भी समीक्षा करनी चाहिए और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में समानता सुनिश्चित करनी चाहिए।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बालानी चौक नाले की भूमि, खसरा नंबर 370 तथा अन्य सरकारी और नजूल जमीनों का निष्पक्ष सीमांकन एवं रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। जांच में अवैध कब्जा या नियम विरुद्ध निर्माण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

शहरवासियों का कहना है कि सुशासन का वास्तविक अर्थ तभी साबित होगा, जब कार्रवाई गरीब और रसूखदार के बीच भेदभाव के बिना की जाए। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन आरोपों और मांगों पर क्या संज्ञान लेता है और सरकारी जमीनों से जुड़े मामलों में जांच व कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाता है।

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